Monday, January 17, 2022

MP News: पंचायतों के परिसीमन को लेकर BJP का कांग्रेस पर पलटवार, कहा-ऐसा हम नहीं होने देंगे

भोपालःHN/ मध्य प्रदेश में पंचायत चुनाव भले ही निरस्त हो चुके हैं, लेकिन प्रदेश में इस मुद्दे पर जमकर सियासत हो रही है. क्योंकि चुनाव निरस्त होने के बाद पंचायतों के संचालन को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है. इस बीच अब शिवराज सरकार ने जल्द ही पंचायतों का परिसीमन कराए जाने का आदेश जारी कर दिया है. जिस पर कांग्रेस ने शिवराज सरकार पर निशाना साधा है, तो बीजेपी ने भी पलटवार करने में देर नहीं लगाई. 

दरअसल, पंचायतों को परिसीमन का आदेश जारी होने के बाद पर कांग्रेस का कहना है कि 2019 में कमलनाथ सरकार ने जो परिसीमन किया वो सही है. इस कारण 2019 के आधार पर चुनाव कराए जाएं. इस पर कांग्रेस विधायक पीसी शर्मा ने कहा कि शिवराज सरकार का ये फैसला कांग्रेस के दबाव में लिया गया है. इसपर पीसीसी चीफ कमलनाथ ने चेतावनी दी थी, कि 2 माह के भीतर चुनाव नहीं हुए तो आंदोलन करेंगे. इस दबाव में ये फैसला लिया गया है. जिस पर बीजेपी ने पलटवार किया है.

नहीं होने देंगे पंचायतों का कांग्रेसीकरणः बीजेपी
कांग्रेस के आरोपों पर जब बीजेपी प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि ”शिवराज सरकार नियमों के हिसाब से काम कर रही है, लेकिन हम पंचायतो का कांग्रेसीकरण नहीं होने देंगे. 
परिसीमन जनता के हित में और जरूरी है, इसलिए नए सिरे से परिसीमन कराया जाएगा.”

कांग्रेस पर साधा निशाना 
वहीं रजनीश अग्रवाल ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कमलनाथ सरकार के दौरान पंचायतों का जो परिसीमन हुआ था, वह कांग्रेस का परिसीमन था. कांग्रेस की सरकार के दौरान परिसीमन के माध्यम से पंचायतों का कांग्रेसीकरण कर दिया गया था.”

सरकार ने जारी किया आदेश
पंचायत चुनाव के लिए सरकार ने परिसीमन का आदेश जारी कर दिया है. पंचायत विभाग ने इस बाबत सभी कलेक्टर को आदेश जारी किए हैं. इसको लेकर ग्राम पंचायतों वार्ड प्रभारियों से सारी जानकारी मांगी गई है. क्षेत्र की जनसंख्या और भौगोलिक जानकारी देने के भी आदेश दिए गए हैं. 17 जनवरी तक पंचायत सचिवों से जानकारी मांगी गई है. बता दें 17 जनवरी से 25 फरवरी तक परिसीमन प्रक्रिया की जाएगी.

पंचायत चुनाव पिछले दो साल से रुके हैं
बता दें कि मध्य प्रदेश पंचायत चुनाव पिछले दो साल से भी ज्यादा समय से रुके हुए हैं. ऐसे में सरपंचों का पांच साल का कार्यकाल सात साल तक हो चुका है. लेकिन हाल ही में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा वापस लिए गए फैसले के बाद वर्तमान में पंचायतों का वित्तीय अधिकार प्रशासनिक अधिकारियों के पास है. जिसका सभी सरपंच विरोध कर रहे हैं. उनकी मांग है कि सरपंचों को उनके वित्तीय अधिकार फिर से मिलने चाहिए. हाईन्यूज़ !

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