Tuesday, April 13, 2021
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जीवनसाथी के खिलाफ बार बार शिकायत करने से उसकी प्रतिष्ठा को लगती है ठेस, बन सकता है तलाक का ठोस आधार-सुप्रीम कोर्ट

दिल्ली:hn/ सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि, एक शिक्षित व्यक्ति का अपने जीवनसाथी के खिलाफ लगातार कई बार शिकायत करना उसके लिए मानसिक प्रताड़ना का कारण बन सकता है. इन शिकायतों से उसकी प्रतिष्ठा और उसके करियर पर बुरा असर पड़ सकता है और इस आधार पर उसे तलाक लेने की इजाजत भी दी जा सकती है. जस्टिस संजय किशन कौल, जस्टिस दिनेश महेश्वरी और जस्टिस ऋषिकेश राय की पीठ ने अपने फैसले में कहा कि पति या पत्नी में से कोई भी यदि इस तरह का व्यवहार करते हैं तो उसे केवल शादीशुदा जिंदगी का हिस्सा नहीं माना जा सकता. वो भी तब जबकि शिकायत करने वाला व्यक्ति शिक्षित है और उसे इन शिकायतों के दुष्परिणाम की भी जानकारी है.

सेना के अधिकारी ने पत्नी के खिलाफ दायर की थी याचिका  

दरअसल सेना के एक अधिकारी ने अपनी पत्नी के खिलाफ तलाक के लिए अर्जी दायर की थी. अपनी याचिका में इस अधिकारी ने कहा था कि, उसकी पत्नी ने सेना के उच्च अधिकारियों के समक्ष उसके खिलाफ कई बार अपमानजनक शिकायत की जिससे उसके खिलाफ कोर्ट ऑफ इंक्वायरी भी हुई और जिसके चलते उसकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची. याचिकाकर्ता ने कहा कि, साथ ही उसकी पत्नी ने राज्य महिला आयोग समेत अन्य कई जगहों पर भी उसके खिलाफ शिकायत की थी. पत्नी ने अपनी दलील में कहा कि, उसने अपनी शादीशुदा जिंदगी को बचाने के लिए आवेश में आकर ये शिकायतें की थी. दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद कोर्ट ने आर्मी अधिकारी के पक्ष में फैसला सुनते हुए उसकी तलाक की अर्जी स्वीकार कर ली.

पत्नी के आचरण को माफ नहीं किया जा सकता 

दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने कहा, “पति ने पत्नी द्वारा लगाए गए आरोपों के कारण जिंदगी और करियर में बुरा असर झेला है. इस मामले में एक शिक्षित जीवनसाथी ने अपने साथी पर आरोप लगाए हैं. इस से पति की अपने सहयोगियों, वरिष्ठों और समाज में प्रतिष्ठा खराब हुई है और पत्नी के इस आचरण को माफ करने की अपेक्षा नहीं की जा सकती. पत्नी का यह कहना न्यायोचित नहीं है कि उसने यह सब शिकायतें अपने वैवाहिक जीवन को बचाने के लिए की थीं.” हाईन्यूज़ !

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